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कबीरदास की साखियां (Hindi Wisdom-bites): Kabirdas Ki Sakhiyan वियोगी हरि

कबीरदास की साखियां (Hindi Wisdom-bites): Kabirdas Ki Sakhiyan

वियोगी हरि

Published April 3rd 2014
ISBN :
Kindle Edition
68 pages
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 About the Book 

साखियां यों तो सभी संतों की निराली हैं। एक-एक शबद उनका अनतर पर चोट करता है। पर कबीर साहब की साखियों का तो और भी निराला रंग है। वे हमारे हृदय पर बडी गहरी छाप छोड जाती हैं। सीधे-सादे अनपढ आदमी पर तो और भी अधिक ये साखियां अपना अमिट परभाव शायद इसलिए डालMoreसाखियां यों तो सभी संतों की निराली हैं। एक-एक शब्द उनका अन्तर पर चोट करता है। पर कबीर साहब की साखियों का तो और भी निराला रंग है। वे हमारे हृदय पर बड़ी गहरी छाप छोड़ जाती हैं। सीधे-सादे अनपढ़ आदमी पर तो और भी अधिक ये साखियां अपना अमिट प्रभाव शायद इसलिए डाल जाती हैं कि उन्हीं की तरह एक अनपढ़ संत ने सहज-सहज जीवन को पहचाना था और उसके साथ एकाकार हो गया था। दूसरों के मुख से सुनी उसने कोई बात नहीं कही, अपनी आंखों-देखी ही कही। जो कुछ भी कहा अनूठा कहा, किसी का जूठा नहीं